- Hindi News
- /
- ताजा खबर
भारत में 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ लोग गरीबी से निकले बाहर; 2.6% पर आई अत्यधिक गरीबी दर

X
भारत में 2011 से 2023 के बीच 49.6 करोड़ लोग गरीबी से निकले बाहर; 2.6% पर आई अत्यधिक गरीबी दर
By - bhaskarbhoominews.com | 30 Oct 2026 06:09 PM
विश्व बैंक की अक्टूबर 2026 की 'पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्ष 2011 से 2023 के बीच अनुमानित 49.6 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं। इस दौरान अत्यधिक गरीबी दर 27.1 प्रतिशत से घटकर महज 2.6 प्रतिशत रह गई है।
भारत ने आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि पिछले 12 वर्षों के दौरान देश के लगभग 49.6 करोड़ नागरिक गरीबी के चंगुल से बाहर निकल चुके हैं। अत्यधिक गरीबी में जीवन यापन करने वाली आबादी का अनुपात गिरकर अब सिर्फ 2.6 प्रतिशत पर आ गया है। इसके अलावा बहुआयामी गरीबी संकेतकों और आम उपभोग में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है। हालांकि, रिपोर्ट में क्षेत्रीय स्तर पर फैली असमानताओं और युवाओं की बेरोजगारी को लेकर चिंता भी जताई गई है
अत्यधिक गरीबी में ऐतिहासिक गिरावट, 4.20 डॉलर आय मानक पर भी भारी सुधार
विश्व बैंक के अनुसार, वर्ष 2011 में देश की 27.1 प्रतिशत आबादी अत्यधिक गरीबी में जीवन यापन कर रही थी, जो 2023 में नाटकीय रूप से घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। वहीं, 2021 की क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर प्रतिदिन 4.20 डॉलर से कम आय वाले लोगों का अनुपात भी 57.7 प्रतिशत से कम होकर 16.1 प्रतिशत पर आ गया है। वैश्विक वित्तीय संस्था ने स्पष्ट किया है कि भारत में मौद्रिक और गैर-मौद्रिक, दोनों ही पैमानों पर जीवन स्तर में ठोस सुधार हुआ है।
रोजगार के अवसर, महिला भागीदारी और खाद्य सब्सिडी से मिली मदद
रिपोर्ट में गरीबी दर में आई इस तीव्र गिरावट के मुख्य कारणों का भी विश्लेषण किया गया है। विश्व बैंक ने बताया कि घरेलू खपत में निरंतर वृद्धि, रोजगार के व्यापक अवसरों का सृजन और विशेषकर महिलाओं की कामकाजी भागीदारी में बढ़ोतरी ने इसमें निर्णायक भूमिका निभाई है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों की सामाजिक सहायता योजनाओं, मुफ्त व रियायती खाद्य सब्सिडी के विस्तार ने भी निचले तबके को गरीबी से उबारने में बड़ा सहारा प्रदान किया है।
बहुआयामी गरीबी दर में भी भारी कमी दर्ज
आर्थिक आय के अलावा जीवन स्तर से जुड़ी बहुआयामी गरीबी (MPI) में भी अभूतपूर्व गिरावट आई है। ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव के आंकड़ों के अनुसार, भारत में बहुआयामी गरीबी दर वर्ष 2005-06 के 53.8 प्रतिशत से घटकर 2019-21 में 16.4 प्रतिशत पर आ गई थी। वहीं, विश्व बैंक के आंतरिक बहुआयामी गरीबी मापदंडों के ताजा आकलन के अनुसार, वर्ष 2022-23 में यह दर और घटकर 15.5 प्रतिशत रह गई है।
उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक गरीब आबादी का बड़ा संकेंद्रण
राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रगति के बावजूद रिपोर्ट क्षेत्रीय असमानता की एक गंभीर तस्वीर पेश करती है। भारत की कुल गरीब आबादी का लगभग 57 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक के सटे हुए भौगोलिक गलियारे में केंद्रित है। विश्व बैंक का मानना है कि देश से गरीबी का पूर्ण उन्मूलन करने के लिए इन पूर्वी और मध्य राज्यों में उत्पादक और उच्च मूल्य वाले रोजगार के अवसर पैदा करना सबसे महत्वपूर्ण होगा।
13.4 करोड़ नए रोजगार जुड़े, लेकिन युवा बेरोजगारी और कम आय अब भी चुनौती
वर्ष 2017 से 2023 के बीच देश में रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या में करीब 13.4 करोड़ की बढ़ोतरी हुई, जो कामकाजी उम्र की आबादी की वृद्धि से लगभग दोगुनी थी। हालांकि, रोजगार की गुणवत्ता को लेकर चुनौतियां बरकरार हैं। वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 की पहली तिमाहियों के बीच युवाओं में बेरोजगारी दर 14.6 प्रतिशत से बढ़कर 15.9 प्रतिशत पहुंच गई, जिसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण युवा युवतियों पर देखा गया। इसके साथ ही अधिकांश नए रोजगार कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों तक सीमित रहने से वास्तविक कमाई में बहुत बड़ा उछाल देखने को नहीं मिला है।

