- Hindi News
- /
- चुनाव
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया पूरी; आयोग ने जारी की अंतिम सूची, कटे एक करोड़ से अधिक नाम

X
कर्नाटक में SIR प्रक्रिया पूरी; आयोग ने जारी की अंतिम सूची, कटे एक करोड़ से अधिक नाम
By - bhaskarbhoominews.com | 27 Oct 2026 07:03 PM
लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता चुनाव प्रक्रिया की सबसे बुनियादी शर्त मानी जाती है। कई वर्षों तक व्यापक पुनरीक्षण न होने के कारण सूचियों में स्थायी रूप से पलायन कर चुके लोगों, मृतकों और फर्जी या दोहरे नामों के बने रहने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
कर्नाटक में वर्ष 2002 के बाद पहली बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) जैसा सघन अभियान शुरू किया गया था। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य घर-घर जाकर वास्तविक मतदाताओं का सत्यापन करना और अपात्र प्रविष्टियों को बाहर कर एक पारदर्शी और त्रुटिहीन मतदाता सूची तैयार करना था। कई महीनों तक चले डोर-टू-डोर सर्वे, नोटिस, सुनवाई और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अब राज्य की अंतिम तस्वीर सामने आ गई है।
5.54 करोड़ से घटकर 4.54 करोड़ हुई मतदाताओं की संख्या
राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पुनरीक्षण से पहले कर्नाटक में मतदाताओं की कुल संख्या 5,54,32,314 थी। सघन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम सूची में यह आंकड़ा घटकर 4,54,55,689 रह गया है।
अंतिम सूची में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक दर्ज की गई है, जिसमें 2,29,12,355 महिला मतदाता, 2,25,40,493 पुरुष मतदाता और 2,841 थर्ड-जेंडर मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग के 6.83 लाख से अधिक नए युवा मतदाता पहली बार सूची में जोड़े गए हैं।
स्थायी रूप से शिफ्ट और मृत मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक
बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा 30 जून से शुरू किए गए घर-घर सत्यापन में 4.46 करोड़ प्रगणन फॉर्म ही हस्ताक्षरित होकर जमा हुए थे। प्रारूप सूची के दौरान ही 1.07 करोड़ से अधिक नाम गणना से बाहर पाए गए थे।
इनमें सबसे बड़ा हिस्सा उन 65.45 लाख मतदाताओं का था जो अपने पते से स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हो चुके थे। इसके अलावा 19 लाख से अधिक अनुपस्थित, 16.39 लाख मृत और 7.09 लाख ऐसे नाम पाए गए जो पहले से अन्य स्थानों पर दर्ज थे या उनके डुप्लीकेट रिकॉर्ड मौजूद थे।
43 लाख से अधिक को नोटिस और 61 हजार से ज्यादा अयोग्य करार
निर्वाचन आयोग ने डेटा विसंगतियों और सत्यापन की आवश्यकता वाले 43,82,824 मतदाताओं को आधिकारिक नोटिस जारी किए थे। निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, इन सभी मामलों में व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई।
विस्तृत पड़ताल और दस्तावेजों की जांच के बाद 61,867 मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जाने के अयोग्य घोषित कर दिया गया। यह पूरी सत्यापन प्रक्रिया 22 अक्टूबर को संपन्न हुई, जिसके बाद अंतिम सूची जारी करने का रास्ता साफ हुआ।
दावे और आपत्तियों के दौरान जुड़े 10 लाख नए नाम
प्रारूप सूची के प्रकाशन के बाद 24 अगस्त से 23 सितंबर तक चले दावे और आपत्तियों के दौर में 10,08,038 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए, जिनमें 8.77 लाख से अधिक नए पंजीकरण फॉर्म-6 के जरिए हुए।
इसी समयावधि में 1.88 लाख नामों को हटाया गया और लगभग 8.96 लाख प्रविष्टियों में संशोधन किया गया। हटाए गए नामों में भी अधिकांश लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित पाए गए। 22 अक्टूबर तक सभी दावों के निस्तारण के साथ ही अब राज्य को एक अद्यतन और शुद्ध मतदाता सूची मिल गई है।

