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जलसंकट : इंदौर में नगर निगम के 361 बोरिंग अभी से सूखे, वार्डों में जल्द कराए जाएंगे 200 बोरिंग

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जलसंकट : इंदौर में नगर निगम के 361 बोरिंग अभी से सूखे, वार्डों में जल्द कराए जाएंगे 200 बोरिंग
By - bhaskarbhoominews.com | 17 Oct 2026 01:42 PM
ग्रीष्मकाल में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए नगर निगम ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। गर्मी के तेवर अभी तीखे नहीं हुए हैं, ग्रीष्मकाल भी दूर है, लेकिन नगर निगम का सर्वे बताता है कि शहर में निगम के 361 बोरिंग पूरी तरह से सूख चुके हैं। इन बोरिंग के निकट भविष्य में दोबारा रिचार्ज होने की कोई संभावना भी नहीं है।
इंदौर में गर्मी शुरू होने से पहले ही जलसंकट चुनौती बनने लगा है। नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक शहर में कुल 6,040 ट्यूबवेल हैं, जिनमें से 361 बंद हो चुके हैं। वहीं, शहर की जरूरत पूरी करने के लिए 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है।
इनमें से 100 के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। शहर के 22 जोन में पानी की समस्या बनी हुई है। कई इलाकों में लोग अभी से टैंकर बुलवाकर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।
चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि इस बार शहर में सामान्य से करीब 14 इंच कम बारिश हुई है। ऐसे में नए ट्यूबवेल की खुदाई के साथ भूजल की उपलब्धता भी चुनौती रहेगी। नगर निगम को बंद ट्यूबवेल चालू करने, नए जलस्रोत विकसित करने और मौजूदा संसाधनों से जलप्रदाय बनाए रखने की व्यवस्था करनी होगी।

इंदौर के कई इलाकों में लोग सुबह से ही पानी की व्यवस्था करने में जुट जाते हैं।
361 ट्यूबवेल बंद, 200 नए खोदने की जरूरत
नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, शहर के 6,040 ट्यूबवेल में से 361 फिलहाल बंद हैं। इनमें ऐसे स्थान भी शामिल हैं, जहां नर्मदा जल का कनेक्शन नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में स्थानीय जलस्रोत बंद होने से पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। निगम ने बंद ट्यूबवेल की मरम्मत, पंप सुधारने और तकनीकी समस्याओं के निराकरण के लिए 10 समर्पित टीमें लगाने की योजना बनाई है। दूसरी ओर, शहर की जरूरतों को देखते हुए 200 नए ट्यूबवेल खोदने की आवश्यकता बताई गई है। फिलहाल 100 के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।
भूजल स्तर कम, खुदाई से पहले सर्वे जरूरी
नए ट्यूबवेल खोदने की योजना के सामने भूजल की उपलब्धता बड़ी चुनौती है। कई इलाकों में भूजल स्तर नीचे होने के कारण बोरिंग से पर्याप्त पानी मिलना आसान नहीं है। ऐसे में खुदाई के लिए स्थान तय करते समय तकनीकी सर्वे और भूजल की स्थिति का आकलन जरूरी होगा। इसके साथ वर्षाजल संचयन, भूजल पुनर्भरण और मौजूदा जलस्रोतों के बेहतर इस्तेमाल पर भी ध्यान देना होगा।

