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4 घंटे तक नहीं मिला इलाज, बुजुर्ग की मौत:ग्वालियर के अस्पताल में डॉक्टरों-स्टाफ के पीछे भागती रही पत्नी; तड़प-तड़पकर तोड़ा दम

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4 घंटे तक नहीं मिला इलाज, बुजुर्ग की मौत:ग्वालियर के अस्पताल में डॉक्टरों-स्टाफ के पीछे भागती रही पत्नी; तड़प-तड़पकर तोड़ा दम
By - bhaskarbhoominews.com | 23 Sep 2026 03:50 PM
मौत के बाद ही नसीब हो पाया स्ट्रेचर
रतिराम की सांसें थमने के बाद अस्पताल स्टाफ ने स्ट्रेचर मंगवाया और उन्हें ICU ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। रामप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
रामप्यारी के पास शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस का किराया तक नहीं था।
मारपीट के विरोध में हड़ताल पर रहे डॉक्टर
4 घंटे तक नहीं मिला इलाज, बुजुर्ग की मौत:ग्वालियर के अस्पताल में डॉक्टरों-स्टाफ के पीछे भागती रही पत्नी; तड़प-तड़पकर तोड़ा दम
ग्वालियर में इलाज नहीं मिलने की वजह से सरकारी अस्पताल में 60 वर्षीय रतिराम की मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि बुधवार सुबह 10 बजे अस्पताल पहुंचे रतिराम का पर्चा बना, टेस्ट भी हुए लेकिन दोपहर 2 बजे तक भर्ती नहीं किया गया। उनकी हालत बिगड़ती गई और आखिरकार अस्पताल के फर्श पर ही उनकी मौत हो गई।
मामला ग्वालियर-चंबल संभाग के सबसे बड़े 1000 बिस्तर के अस्पताल का है। इलाज नहीं मिलने का कारण डॉक्टरों की हड़ताल को बताया जा रहा है। हालांकि, इस पर प्रशासन की तरफ से आधिकारिक बयान नहीं मिल पाया है।
दतिया और झांसी में नहीं सुधरी तबीयत
दतिया जिले के ऊंचिया गांव निवासी रतिराम को बीते डेढ़ महीने से तेज बुखार था। स्थानीय डॉक्टरों ने खून की कमी बताई थी। पत्नी रामप्यारी ने उनका इलाज दतिया मेडिकल कॉलेज और झांसी के सरकारी अस्पतालों में कराया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
फर्श पर गिर पड़े, दर्द से कराहते रहे
परिचितों की सलाह पर रामप्यारी बुधवार को रतिराम को बस से ग्वालियर लाई। यहां 1000 बिस्तरों के अस्पताल में कतार में लगकर पर्चा बनवाया। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांचें लिखीं, वो भी करा लीं।
रामप्यारी के मुताबिक, किसी डॉक्टर ने रतिराम की जांच नहीं की। वार्ड में भर्ती नहीं कराया गया। दोपहर में बुखार बढ़ने पर रतिराम बेंच से नीचे फर्श पर गिर पड़े। दर्द से कराहते रहे। वे डॉक्टरों और स्टाफ से इलाज की गुहार लगाती रही लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
गार्ड्स ने कही डॉक्टरों के हड़ताल पर होने की बात
अस्पताल में इलाज कराने आईं सबीना और दो अन्य युवकों ने रामप्यारी की मदद के लिए गार्ड्स से स्ट्रेचर मांगा। इस पर गार्ड्स ने डॉक्टरों के हड़ताल पर होने की बात कही।
रतिराम करीब एक घंटे तक फर्श पर पड़े रहे। आखिरकार अस्पताल पहुंचने के करीब चार घंटे बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।
मौत के बाद ही नसीब हो पाया स्ट्रेचर
रतिराम की सांसें थमने के बाद अस्पताल स्टाफ ने स्ट्रेचर मंगवाया और उन्हें ICU ले जाया गया। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। रामप्यारी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
रामप्यारी के पास शव को घर ले जाने के लिए एंबुलेंस का किराया तक नहीं था।
मारपीट के विरोध में हड़ताल पर रहे डॉक्टर
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉ. प्रदीप और डॉ. अनंत अय्या का एक मरीज के परिजन से विवाद हो गया था। मारपीट भी हुई थी। इसके विरोध में ही डॉक्टर हड़ताल पर थे।

