- Hindi News
- /
- मध्य प्रदेश
आरंगेत्रम - महायोगी माधवम्: भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

X
आरंगेत्रम - महायोगी माधवम्: भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
By - bhaskarbhoominews.com | 19 May 2026 09:10 AM
आरंगेत्रम - महायोगी माधवम्’ कार्यक्रम में भरतनाट्यम के जरिए भगवान श्रीकृष्ण के भावों और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदर परंपरा को जीवंत किया गया। देवांशी, पलक और अदिति की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भारतीय शास्त्रीय नृत्य, भक्ति और अध्यात्म का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला, जब नृत्य अकादमी द्वारा ‘आरंगेत्रम - महायोगी माधवम्’ का भव्य आयोजन किया गया। भरतनाट्यम की पारंपरिक शैली में भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न स्वरूपों और भावों को इतनी खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया कि पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
इस खास अवसर पर शिष्याएं देवांशी उपाध्याय, पलक शर्मा और अदिति वानखेड़े ने वर्षों की कठिन साधना और समर्पण को मंच पर जीवंत कर दिया। गुरु हीरल बलसारा गांधी के मार्गदर्शन में तीनों कलाकारों ने भाव, लय और ताल के शानदार समन्वय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कृष्ण भक्ति और अध्यात्म की सुंदर प्रस्तुति
कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘महायोगी माधव’ रहा, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के आध्यात्मिक और भावनात्मक स्वरूपों को भरतनाट्यम के जरिए मंच पर उतारा गया। प्रस्तुति में जतिस्वरम, वर्णम, अभिनय और तिल्लाना जैसे शास्त्रीय अंशों ने आयोजन को और भी खास बना दिया।
भावपूर्ण अभिनय, सटीक मुद्राएं और करुण रस की अभिव्यक्ति ने दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखा। हर प्रस्तुति भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शा रही थी।
दर्शकों ने सराहा समर्पण और साधना
कार्यक्रम में मौजूद कला प्रेमियों, अभिभावकों और अतिथियों ने शिष्याओं की प्रस्तुति की जमकर सराहना की। मंच पर दिखाई गई अनुशासन, साधना और कला के प्रति समर्पण ने आयोजन को यादगार बना दिया।
कला और अध्यात्म का अनूठा संगम
‘आरंगेत्रम - महायोगी माधवम्’ सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि भारतीय कला, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का सुंदर संगम बनकर सामने आया। इस आयोजन ने दर्शकों के मन में भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति नई ऊर्जा और गहरी छाप छोड़ी।
‘आरंगेत्रम - महायोगी माधवम्’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय कला, अध्यात्म और साधना का सुंदर संगम बनकर सामने आया, जिसने उपस्थित दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ दी।

