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SIR को लेकर चुनाव आयोग में घमासान! दो आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार जताई आपत्ति

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SIR को लेकर चुनाव आयोग में घमासान! दो आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार जताई आपत्ति
By - bhaskarbhoominews.com | 23 Sep 2026 02:21 PM
SIR को लेकर चुनाव आयोग में घमासान! दो आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार जताई आपत्ति
नई दिल्ली। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही असहमति की खबरों ने सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। आयोग के दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई।
बताया गया है कि कई फैसले और आदेश ऐसे थे, जिन पर दोनों आयुक्तों ने सवाल उठाते हुए कहा कि ये उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए। खास बात यह है कि एक ही दिन में चार अलग-अलग मामलों में आपत्ति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।bhaskarbhoominews.com
वोटर लिस्ट से लेकर IT सिस्टम तक उठे सवाल
दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां चुनाव आयोग के बेहद अहम कामकाज से जुड़ी बताई जा रही हैं। इनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, वोटर लिस्ट से नाम हटाना, नाम दोबारा जोड़ना, SIR के दौरान नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील और मतदाता सूची से जुड़े IT सिस्टम की निगरानी जैसे मुद्दे शामिल हैं।
इन आपत्तियों की जानकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक भी पहुंचाई गई थी। कुछ मामलों में संबंधित अधिकारियों को भी इसकी प्रतियां भेजी गईं।
संधू ने कार्रवाई पर उठाया बड़ा सवाल
एक लिखित आपत्ति में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने कथित तौर पर कहा कि आयोग ने दो आयुक्तों की लिखित सलाह के विपरीत कदम उठाया। उन्होंने इस कार्रवाई को ‘अनाधिकृत और गैर-कानूनी’ बताया।
इसके बाद दोनों चुनाव आयुक्तों ने काम के बंटवारे में हुए बदलावों को लेकर कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र भी लिखे।bhaskarbhoominews.com
IT सिस्टम की निगरानी पर भी विवाद
मामला सिर्फ वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं रहा। मतदाता सूची से जुड़े IT सिस्टम की निगरानी की व्यवस्था में बदलाव को लेकर भी दोनों आयुक्तों ने आपत्ति जताई।
उनका कहना था कि काम के बंटवारे में किए गए बदलावों से निगरानी का एक स्तर समाप्त हो गया था और ये बदलाव उनकी जानकारी के बिना किए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने इन बदलावों को रद्द कर दिया।
SIR पर बढ़ता विवाद
बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया को लेकर पहले से ही मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं। अब आयोग के भीतर दो चुनाव आयुक्तों की बार-बार दर्ज कराई गई आपत्तियों ने निर्णय लेने की प्रक्रिया और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर एक नया सवाल खड़ा कर दिया है।
10 महीने में 14 आपत्तियां—सवाल सिर्फ SIR पर नहीं, बल्कि चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने के तरीके पर भी उठ रहे हैं।

