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सीजेआई पर टिप्पणी को लेकर SC सख्त; संजय राउत और निखिल वागले को अवमानना नोटिस जारी

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सीजेआई पर टिप्पणी को लेकर SC सख्त; संजय राउत और निखिल वागले को अवमानना नोटिस जारी
By - bhaskarbhoominews.com | 16 Oct 2026 07:09 PM
सीजेआई पर टिप्पणी को लेकर SC सख्त; संजय राउत और निखिल वागले को अवमानना नोटिस जारी
भारत के मुख्य न्यायाधीश पर की गई विवादास्पद टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत और वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले को औपचारिक नोटिस जारी किया है।
संवैधानिक संस्थाओं और न्यायपालिका के शीर्ष पद पर की जाने वाली सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने गहरी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश को निशाना बनाकर दिए गए बयानों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष अदालत ने दोनों प्रमुख व्यक्तियों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया है और स्पष्ट संदेश दिया है कि संस्थाओं की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाले आचरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की याचिका पर कार्रवाई
संजय राउत और निखिल वागले द्वारा सार्वजनिक मंचों पर सीजेआई को लेकर की गई टिप्पणियों के विरोध में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अवमानना याचिका दाखिल की थी। एसोसिएशन का तर्क था कि इस प्रकार के बयानों से शीर्ष न्यायपालिका की गरिमा धूमिल होती है और आम जनता के बीच अदालत की साख पर अनुचित सवाल खड़े होते हैं। अदालत ने इस याचिका पर विचार करते हुए दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
संस्थाओं पर हमले को बताया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी संवैधानिक संस्था पर इस तरह के अनर्गल हमले बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। अदालत ने रेखांकित किया कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार जरूर है, लेकिन संवैधानिक पदों और न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही अनिवार्य है। न्याय व्यवस्था पर हमला करने की प्रवृत्ति को किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
मौलिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा पर जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका की भूमिका का स्मरण कराते हुए कहा कि देश की अदालतें नागरिकों की निजी स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों की रक्षा करने में कभी भी पीछे नहीं रही हैं। अदालत ने कहा कि संविधान के तहत मिले अधिकारों की पहरेदारी करना न्यायपालिका की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे वह निष्ठापूर्वक निभाती आ रही है। ऐसे में संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अत्यंत अनुचित है।
अगली सुनवाई में व्यक्तिगत पेशी से मिली छूट
अदालत ने नोटिस जारी करते हुए दोनों प्रतिवादियों को आंशिक राहत भी दी। पीठ ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई की तारीख पर संजय राउत और निखिल वागले को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होने की आवश्यकता नहीं है, उनके अधिवक्ता उनका पक्ष रख सकते हैं। मामले में आगे की कानूनी दिशा दोनों पक्षों द्वारा अदालत के समक्ष रखे जाने वाले स्पष्टीकरण और हलफनामे के आधार पर तय होगी।

