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मोहन भागवत का विपक्ष को संदेश: बोले- भारत में नहीं होगा सत्ता परिवर्तन, आंदोलन से दुश्मनी नहीं समाधान निकालें

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मोहन भागवत का विपक्ष को संदेश: बोले- भारत में नहीं होगा सत्ता परिवर्तन, आंदोलन से दुश्मनी नहीं समाधान निकालें
By - bhaskarbhoominews.com | 20 Oct 2026 06:43 PM
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने दशहरा संबोधन में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों, विरोध प्रदर्शनों और राष्ट्रीय एकता पर बयान दिया। जानिए उन्होंने क्या कहा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने वार्षिक विजयादशमी संबोधन में सत्ता परिवर्तन की मांग और विरोध प्रदर्शनों को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन नहीं होगा और देश में इस तरह की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। फ्रांस, बांग्लादेश और नेपाल में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना जारी रखा है और समाज की सामूहिक शक्ति मजबूत हुई है
आंदोलन का उद्देश्य समाधान होना चाहिए'
मोहन भागवत ने कहा कि समस्याएं पैदा होती हैं और उनके विरोध में आंदोलन भी होते हैं, लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समाधान खोजना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विरोध के नाम पर समाज में दुश्मनी नहीं फैलनी चाहिए और हर गतिविधि में मर्यादा का पालन किया जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आंदोलनों का मकसद केवल वोट हासिल करना या सस्ती लोकप्रियता पाना नहीं होना चाहिए। समाज में वास्तविक समाधान संवाद और आपसी चर्चा से निकलते हैं। इसलिए किसी भी मुद्दे पर टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत के रास्ते तलाशने चाहिए।
समाज में असंतोष और अराजकता फैलाने वाली ताकतों से सतर्क रहने की अपील
RSS प्रमुख ने कहा कि कुछ ताकतें लोगों के भीतर पीड़ित होने की भावना पैदा करके असंतोष और अराजकता को बढ़ावा देने का प्रयास करती हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी कोशिशों के प्रति सतर्क रहने की अपील की।
भागवत के अनुसार, समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों से पैदा होने वाले वैचारिक भ्रम से बचना जरूरी है। लोगों को उकसावे में आने के बजाय आपसी सद्भाव बनाए रखना चाहिए।
भारत की विविधता को अलगाव नहीं, एकता का आधार मानें
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एकता और भारत की विविधता को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को पूजा-पद्धतियों के अंतर को लेकर गलत धारणाएं छोड़नी होंगी। विविधता को अलगाव के रूप में देखने की प्रवृत्ति से भी बाहर निकलना होगा।
उन्होंने भारत के प्रति समर्पण, पूर्वजों पर गर्व और भारतीय संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को देश को एकजुट रखने वाले तीन प्रमुख सूत्र बताया। उनके मुताबिक, इन साझा मूल्यों को अपनाकर ही देश की प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ा जा सकता है।
'भारत को विश्वगुरु बनाने का लक्ष्य हमेशा सामने रहे'
भागवत ने कहा कि देश को विश्वगुरु बनाने का लक्ष्य हमेशा ध्यान में रखना चाहिए। इसके लिए समाज में आपसी सद्भाव बनाए रखना, विभाजनकारी प्रवृत्तियों से बचना और राष्ट्रीय हित को व्यक्तिगत अहंकार से ऊपर रखना जरूरी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी तरह के उकसावे से प्रभावित हुए बिना देश की एकता और प्रगति के लिए प्रयास करते रहें। उनके संबोधन में सामाजिक संवाद, राष्ट्रीय एकजुटता और भारत की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का संदेश प्रमुख रहा।

