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प्रदर्शन दबाए गए तो नेपाल-बांग्लादेश जैसे बन सकते हैं हालात'; अर्धसैनिक बलों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

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प्रदर्शन दबाए गए तो नेपाल-बांग्लादेश जैसे बन सकते हैं हालात'; अर्धसैनिक बलों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
By - bhaskarbhoominews.com | 25 Oct 2026 09:40 PM
लद्दाख के पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों के महत्व को रेखांकित करते हुए केंद्र सरकार को आगाह किया है।
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत सोनम वांगचुक ने मुंबई के एक कार्यक्रम में देश के लोकतांत्रिक स्पेस, आंतरिक सुरक्षा और सीमाई चुनौतियों पर विस्तृत विचार रखे।
हाल ही में दिल्ली मार्च और हिरासत से जुड़े अनुभवों के संदर्भ में उन्होंने रेखांकित किया कि असहमति की आवाजों को दबाने के बजाय शासन को जनता के साथ संवाद का रास्ता खुला रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों की चिंताओं को अनसुना करना किसी भी चुनी हुई सरकार के हित में नहीं होता।
'फीडबैक मैकेनिज्म हैं प्रदर्शन, दबाने से भड़कता है बड़ा संकट'
सोनम वांगचुक ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में सड़कों पर होने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शन सरकारों को सही रास्ते पर रखने का एक बड़ा माध्यम हैं। उन्होंने कहा, "अगर आप ऐसी चीजें करेंगे जिनकी जरूरत नहीं है, तो लोग आपके खिलाफ आवाज उठाएंगे। इसे दबाना सरकार को ही नुकसान पहुंचाता है
जब शांतिपूर्ण तरीके से गुस्सा और असंतोष जाहिर करने की जगह नहीं मिलती, तो हालात नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे जनविद्रोहों में बदल जाते हैं।" उन्होंने सरकारों को सलाह दी कि 'संदेशवाहक को निशाना बनाने' के बजाय समस्या के मूल कारणों का समाधान किया जाना चाहिए।
वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का हवाला: संसद के सामने विरोध की अनुमति
अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का उल्लेख करते हुए वांगचुक ने कहा कि ब्रिटेन, नॉर्वे और स्वीडन जैसे विकसित लोकतंत्रों में संसद के ठीक सामने जनता को विरोध दर्ज कराने की अनुमति होती है। उन्होंने कहा, "दुनिया भर में संसद का अग्रिम हिस्सा प्रदर्शन का चेहरा होता है, ताकि जनप्रतिनिधि जनता की आवाज सुन सकें।
लेकिन हमारे यहां प्रदर्शन स्थल को संसद से बहुत दूर कर दिया गया है। नई दिल्ली का जंतर-मंतर भी संसद भवन से काफी दूर है, जिससे जनता का सीधा संवाद बाधित होता है।"
अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर सवाल: सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता की मांग
वांगचुक ने आंतरिक विरोध और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल गृह मंत्रालय के अधीन आते हैं और उनका इस्तेमाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों और युवाओं के खिलाफ किया जा रहा है।
वांगचुक ने मांग की कि देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के बीच संतुलन होना चाहिए और इन बलों को सीमा रक्षा के लिए प्राथमिक रूप से लगाया जाना चाहिए

