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सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने हेतु यातायात पुलिस दुर्ग की महत्वपूर्ण पहल

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सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने हेतु यातायात पुलिस दुर्ग की महत्वपूर्ण पहल
By - bhaskarbhoominews.com | 30 Jun 2026 10:22 PM
सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने हेतु यातायात पुलिस दुर्ग की महत्वपूर्ण पहल
▪️ सड़क दुर्घटना में घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यातायात पुलिस, डायल-112 एवं 108 एंबुलेंस सेवा की संयुक्त बैठक आयोजित।
▪️ राष्ट्रीय राजमार्ग एवं जिले के प्रमुख ब्लैक स्पॉट स्थलों पर एंबुलेंस की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर बनी सहमति।
▪️ दुर्घटना की सूचना मिलते ही न्यूनतम समय में राहत एवं उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय।
आज दिनांक 30 जून 2026 को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, यातायात दुर्ग कार्यालय, नेहरू नगर में सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को शीघ्र चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में डायल-112 के संभाग प्रभारी श्री आसिम खान तथा 108 एंबुलेंस सेवा के दुर्ग प्रभारी श्री निर्मल वर्मा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान गोल्डन आवर (Golden Hour) का अधिकतम उपयोग करते हुए घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार एवं अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान निर्णय लिया गया कि जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) एवं दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार एंबुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी, ताकि दुर्घटना की सूचना मिलते ही तत्काल राहत एवं चिकित्सा सहायता प्रदान की जा सके।
प्राथमिकता के आधार पर निम्न प्रमुख स्थानों पर एंबुलेंस उपलब्ध कराने पर सहमति बनी:—
▪️एमएलटी क्रेन, खुर्सीपार
▪️बिजली ऑफिस, भिलाई-3
▪️बड़े तरिया, कुम्हारी
▪️जेके लक्ष्मी सीमेंट क्षेत्र
▪️पंथी चौक
डायल-112 एवं 108 एंबुलेंस सेवा के अधिकारियों ने जनहित एवं सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इन स्थानों पर आवश्यकतानुसार एंबुलेंस उपलब्ध कराने पर सहमति प्रदान की।
यातायात पुलिस दुर्ग का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को *'गोल्डन आवर' के भीतर त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर अधिक से अधिक लोगों का जीवन सुरक्षित करना है। इस दिशा में सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर लगातार प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।*

