महिला आरक्षण बिल चुनाव के बीच फिर बना बहस का मुद्दा, विपक्ष ने समय पर उठाया सवाल

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महिला आरक्षण बिल चुनाव के बीच फिर बना बहस का मुद्दा, विपक्ष ने समय पर उठाया सवाल

महिला आरक्षण बिल चुनाव के बीच फिर बना बहस का मुद्दा, विपक्ष ने समय पर उठाया सवाल

देश के पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के बीच एक बार फिर से महिला आरक्षण बिल चुनावी बहस के केंद्र में आ गया है। इस बिल को लेकर पक्ष और विपक्ष दोनों दलों के नेता समर्थन करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन दबी जुबान में विपक्ष बिल पेश करने के समय पर सवाल उठा रहा है। इन दलों का मानना है कि सरकार ने चुनाव में फायदा लेने के लिए वह समय चुना जब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार भी चल रहा होगा। जबकि सरकार इसे बाद में भी ला सकती थी।

नेताओं की मानें तो सरकार 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के सत्र में इस बिल को पेश कर सकती है। महिला आरक्षण बिल का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसद सीटों का आरक्षण सुनिश्चित करना है। बिल के पारित होने के बाद भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि देखने को मिलेगी। वर्तमान में संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है, जिसे बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।

ऐसे में यह बिल पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। सत्तारूढ़ दल इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताकर पेश कर सकती है। इस बिल का असर खासतौर पर महिला मतदाताओं पर पड़ सकता है, जो हाल के वर्षों में चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी ने महिलाओं को ध्यान में रखकर पहले ही कई योजनाएं शुरू की है। ऐसे में वह इस बिल का समर्थन कर महिलाओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास करेंगी।

इस संबंध में केरल से कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने कहा कि कांग्रेस इस बिल का समर्थन करती हैं। संसद में बिल के पक्ष में अपना मत रखेगी। पार्टी ने हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। पार्टी ने नेता सोनिया गांधी ने हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) अजित पवार गुट के राष्ट्रीय महामंत्री और प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता बृजमोहन श्रीवास्तव ने कहा कि इस बिल से सदन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि बिल को पूरी तरह से प्रभावी व लागू होने में दस साल का समय लग जाएगा।इससे पहले स्थानीय निकाय में इस आरक्षण को लागू किया गया था, जिसे जमीन पर उतारने में दस साल लग गए थे। तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि महिला बिल पर भाजपा ने कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी है। वह केवल चुनावी बयान बाजी कर रही है, भाजपा लोगों के हित में कुछ नहीं करती।

भाजपा बोली- महिलाओं को उनका अधिकार देंगे

भाजपा के तमिलनाडु के राज्य सचिव विनोज पी सेल्वम ने कहा कि विपक्ष बिल के समय को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को विकास को लेकर काम कर रहे हैं। देश में हर साल चुनाव होते ही रहते हैं। ऐसे में संसद में लाने का सभी समय उचित है। भाजपा ने महिलाओं के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया। अब इस बिल को पास करवाकर महिलाओं को उनका उचित अधिकार भी देंगे। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में पहले चरण का प्रचार 21 अप्रैल को थम जाएगा। वहीं पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का प्रचार 27 अप्रैल को थमेगा। ऐसे में संभावना है कि 16 अप्रैल से शुरू होने वाले संसद के दौरान इस बिल का असर चुनावी चर्चाओं में देखने को मिल सकता है। तमिलनाडु में महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले अधिक है।

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