लखपति दीदी सफलता कहानी:बिहान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं नंदनी कुम्भकार

लखपति दीदी सफलता कहानी:बिहान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं नंदनी कुम्भकार
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लखपति दीदी सफलता कहानी:बिहान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं नंदनी कुम्भकार

लखपति दीदी सफलता कहानी:बिहान से जुड़कर आत्मनिर्भर बनीं नंदनी कुम्भकार

दुर्ग। जिला दुर्ग के विकासखण्ड दुर्ग अंतर्गत ग्राम थनौद में 18 फरवरी 2018 को जय कुम्भकार स्व सहायता समूह का गठन किया गया। इस समूह में कुल 13 सदस्य हैं, जिनमें से 12 सदस्य पारंपरिक कुम्भकारी कार्य से जुड़े हुए हैं। समूह की सक्रिय सदस्य नंदनी कुम्भकार ने अपने परिश्रम, लगन और बिहान मिशन के सहयोग से “लखपति दीदी” बनने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
नंदनी कुम्भकार बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले कुम्भकारी कार्य के लिए उन्हें अधिक ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता था। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण वे बड़े स्तर पर मूर्ति निर्माण का कार्य नहीं कर पाती थीं और छोटी-मोटी आय से परिवार का भरण-पोषण करना भी कठिन हो जाता था।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़े सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (CRP) के माध्यम से उन्हें स्व सहायता समूह के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर समूह का गठन किया और नियमित बचत तथा आपसी लेन-देन की प्रक्रिया प्रारंभ की।
समूह को प्रारंभ में 15,000 रुपये की चक्रीय निधि (रिवाल्विंग फंड) प्राप्त हुई तथा इसके बाद आजीविका गतिविधियों के लिए 60,000 रुपये का बैंक ऋण मिला। वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान नंदनी कुम्भकार ने कुल 1,50,000 रुपये का ऋण लेकर मूर्ति निर्माण का कार्य बढ़ाया, जिसमें से उन्होंने 1,00,000 रुपये ब्याज सहित वापस भी कर दिया है।
वर्तमान में नंदनी कुम्भकार अप्रैल से दिसंबर माह तक मिट्टी से बनी मूर्तियाँ, दीये, घरेलू उपयोग की वस्तुएँ, विवाह संबंधी मिट्टी के उत्पाद तथा बच्चों के खिलौने बनाती हैं। वहीं दिसंबर से मार्च तक ऑर्डर के अनुसार सीमेंट की मूर्तियाँ तैयार करती हैं।
गणेश पूजा, नवरात्रि और दीपावली जैसे पर्वों के दौरान बिहान मिशन के सहयोग से उन्हें बाजार उपलब्ध कराया जाता है, जहाँ वे अपने उत्पादों की बिक्री करती हैं। इन अवसरों पर छोटी मूर्तियाँ, दीये एवं अन्य मिट्टी के उत्पादों की अच्छी बिक्री होती है। वर्ष भर में उनके समूह द्वारा लगभग 9 से 10 लाख रुपये तक की बिक्री होती है, जिसमें से लगभग 5 लाख रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त होती है।
सामाजिक परिवर्तन ..
नंदनी कुम्भकार की सफलता से उनके परिवार और समाज में सकारात्मक बदलाव आए हैं—
परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई।
बच्चो की शिक्षा बेहतर विद्यालयों में प्रारंभ हुई।
घर की आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था हो सकी।
गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरणा मिल रही है।
नंदनी कुम्भकार की यह यात्रा संघर्ष, आत्मविश्वास और मेहनत की प्रेरक कहानी है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से उन्होंने यह साबित किया है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिले तो वे आत्मनिर्भर बनकर “लखपति दीदी” का सपना साकार कर सकती हैं।

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