प्यास से तड़पता दुर्ग, जिम्मेदार बेख़बर: शहर के सभी वाटर एटीएम बंद

प्यास से तड़पता दुर्ग, जिम्मेदार बेख़बर: शहर के सभी वाटर एटीएम बंद
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प्यास से तड़पता दुर्ग, जिम्मेदार बेख़बर: शहर के सभी वाटर एटीएम बंद

प्यास से तड़पता दुर्ग, जिम्मेदार बेख़बर: शहर के सभी वाटर एटीएम बंद

दुर्ग।एक ओर सरकारें “जल जीवन मिशन” और “मानवीय संवेदनाओं” की बात करती हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्ग शहर की ज़मीनी हकीकत शर्मसार करने वाली है। गर्मी शुरू होने से पहले ही दुर्ग प्यासा है, क्योंकि शहर में विधायक निधि से लगाए गए सभी वाटर एटीएम पूरी तरह बंद पड़े हैं। कहीं मशीनें खराब हैं तो कहीं जंग खाकर जवाब दे चुकी हैं, लेकिन उन्हें देखने वाला कोई नहीं

सबसे चौंकाने वाली स्थिति दुर्ग जिला न्यायालय परिसर की है, जहां वर्तमान शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव और पूर्व विधायक अरुण वोरा की निधि से लगाए गए वाटर एटीएम सालों से बंद पड़े हैं। न्याय के मंदिर में आने वाले सैकड़ों नागरिक, अधिवक्ता और पक्षकार पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।

ज्ञानी चुप, सिस्टम मौन
हैरानी की बात यह है कि जिला न्यायालय परिसर में बड़े-बड़े विद्वान और अनुभवी अधिवक्ता मौजूद रहते हैं, लेकिन इस गंभीर जनहित के मुद्दे पर अब तक किसी ने आवाज़ उठाने की ज़रूरत नहीं समझी। क्या पानी जैसी बुनियादी ज़रूरत भी अब किसी केस के आदेश का इंतज़ार कर रही है..?


  1. बस स्टैंड पर प्यास का इम्तिहान
    नए बस स्टैंड स्थित ट्रैफिक चौकी के पास लगा वाटर एटीएम, जो यात्रियों के लिए राहत का साधन था, आज बंद पड़ा लाचार खड़ा है। दूर-दराज़ से आने वाले यात्री, मज़दूर, महिलाएं और बच्चे गर्मी में पानी की एक बूंद के लिए तरसते नज़र आते हैं।
    फ्री पानी बंद, मुनाफ़े का पानी चालू
    शहर में फ्री पानी की व्यवस्था ठप होने के बाद अब आम आदमी के पास बोतलबंद पानी खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। गरीब, मज़दूर और दिहाड़ी करने वालों के लिए यह रोज़ का अतिरिक्त बोझ बन गया है। सवाल यह है कि क्या प्यास बुझाना अब भी मौलिक अधिकार है या सिर्फ़ खरीदने की चीज़..?
    जवाबदेही किसकी..?
    विधायक निधि से लगाए गए वाटर एटीएम का रखरखाव किसकी ज़िम्मेदारी है?
    सालों से बंद मशीनों की जांच अब तक क्यों नहीं हुई..?
    गर्मी से पहले कोई वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था क्यों नहीं की गई..?
    ये सवाल सिर्फ़ प्रशासन से नहीं, बल्कि उन जनप्रतिनिधियों से भी हैं, जो चुनाव के वक्त जनता के बीच खड़े होकर विकास के वादे करते हैं।
    अब भी नहीं जागे तो हालात होंगे बदतर
    अगर समय रहते वाटर एटीएम चालू नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में दुर्ग शहर भीषण जल संकट की ओर बढ़ सकता है। पानी के बिना न न्याय चलता है, न यात्रा और न ही आम आदमी का जीवन।

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