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छत्तीसगढ़ मिड-डे मील विवाद तेज रसोइयों की हड़ताल पर प्रशासन सख्त, संचालनकर्ता समूहों पर कार्रवाई की चेतावनी

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छत्तीसगढ़ मिड-डे मील विवाद तेज रसोइयों की हड़ताल पर प्रशासन सख्त, संचालनकर्ता समूहों पर कार्रवाई की चेतावनी
By - Bhaskar Bhoomi | 30 Jan 2026 06:22 PM
छत्तीसगढ़ मिड-डे मील विवाद तेज: रसोइयों की हड़ताल पर प्रशासन सख्त, संचालनकर्ता समूहों पर कार्रवाई की चेतावनी
रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना (मिड-डे मील) को लेकर चल रही रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में साफ किया गया है कि हड़ताल के कारण यदि भोजन निर्माण प्रभावित होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संचालनकर्ता समूहों की होगी।
मंत्रालय के आदेश के अनुसार, रसोइयों की अनुपस्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया और मिड-डे मील योजना बाधित हुई, तो केवल रसोइयों ही नहीं बल्कि संबंधित संचालनकर्ता समूहों को भी समान रूप से दोषी माना जाएगा।
कार्रवाई की चेतावनी
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि लापरवाही की स्थिति में:
- संचालनकर्ता समूह को हटाया जा सकता है
- कुर्की कास्ट (खर्च मद) में कटौती की जा सकती है
- मानदेय में कटौती जैसे कड़े दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं
यह आदेश प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को भेज दिया गया है, ताकि जिला स्तर पर सख्ती से निगरानी और पालन कराया जा सके। विभाग का कहना है कि मध्यान्ह भोजन योजना बच्चों के पोषण और स्कूल उपस्थिति से सीधे जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रसोइया संघ का पलटवार
वहीं इस आदेश को लेकर रसोइया संघ भड़क उठा है। संघ ने प्रशासन के कदम को तानाशाही करार देते हुए आरोप लगाया है कि यह आदेश हड़ताल को जबरन खत्म कराने की साजिश है। संघ का कहना है कि एक तरफ शिक्षा मंत्री उनकी मांगों को जायज बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारी दमनात्मक आदेश जारी कर रहे हैं, जो आपसी विरोधाभास को दर्शाता है।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि रसोइया पहले से ही बेहद कम मानदेय पर काम कर रही हैं और वर्षों से वेतन वृद्धि, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रही हैं। समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें डराने की नीति अपनाई जा रही है।
86 हजार रसोइया हड़ताल पर, योजना ठप
गौरतलब है कि प्रदेश में 30 दिनों से अधिक समय से करीब 86 हजार रसोइया अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों की मिड-डे मील योजना पर पड़ा है। कई जिलों में बच्चों को भोजन नहीं मिल पा रहा, जिससे योजना के पूरी तरह ठप होने की स्थिति बनती जा रही है।

