मौनी अमावस्या पर बग्घी विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर कार्रवाई के मुड में प्रशासन

मौनी अमावस्या पर बग्घी विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर कार्रवाई के मुड में प्रशासन
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मौनी अमावस्या पर बग्घी विवाद: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर कार्रवाई के मुड में प्रशासन

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प्रयागराज माघ मेला विवाद: प्रशासन सख्त, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर बड़ी कार्रवाई के संकेत

प्रयागराज की संगम नगरी में मौनी अमावस्या के दिन माघ मेला क्षेत्र में हुई अव्यवस्था को लेकर प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ कड़ा रुख अपना लिया है। संगम क्षेत्र में सुरक्षा घेरा तोड़ने और प्रतिबंधित मार्ग पर बग्घी ले जाने के आरोपों के बाद उनकी संस्था को आवंटित जमीन और सरकारी सुविधाएं वापस लेने की तैयारी की जा रही है।

मेला प्रशासन ने स्वामी जी को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर बिजली-पानी समेत सभी सुविधाएं तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएंगी। साथ ही भविष्य में माघ मेले में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।

 

बैरियर तोड़ने और भगदड़ का खतरा
प्रशासन के अनुसार, 18 जनवरी 2026 को मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी पांटून पुल नंबर-02 पर लगे सुरक्षा बैरियर को तोड़कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बग्घी के साथ प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर गए। उस समय संगम पर लाखों श्रद्धालु मौजूद थे और केवल पैदल आवागमन की अनुमति थी। इस कृत्य से भगदड़ जैसी स्थिति बनने का गंभीर खतरा पैदा हो गया।

प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना का आरोप
नोटिस में कहा गया है कि सुरक्षा बलों द्वारा रोके जाने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हुई, जिससे भीड़ प्रबंधन प्रभावित हुआ। इसे प्रशासनिक कार्य में बाधा और आदेशों की सीधी अवहेलना माना गया है।

‘शंकराचार्य’ पद के उपयोग पर भी आपत्ति
प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया है कि सर्वोच्च न्यायालय की रोक के बावजूद मेले में स्वयं को शंकराचार्य बताकर बोर्ड लगाए गए, जो न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है।

सीएम योगी का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी को भी सनातन परंपराओं को बाधित करने का अधिकार नहीं है। संत समाज का दायित्व है कि वह समाज को जोड़ने का कार्य करे, न कि विवाद खड़ा करे।

संत समाज में प्रतिक्रिया
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर केवल नोटिस भेजने का आरोप लगाया है। वहीं जगद्गुरु रामानुजाचार्य ने प्रशासन से माफी मांगकर विवाद समाप्त करने की मांग की है और जरूरत पड़ने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

👉 माघ मेला विवाद अब प्रशासन बनाम संत समाज की बड़ी टकराहट की ओर बढ़ता दिख रहा है

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