साइबर ठगों पर बड़ा वार 80 सिम कार्ड बंद, 15 मोबाइल के IMEI नंबर ब्लॉक

साइबर ठगों पर बड़ा वार 80 सिम कार्ड बंद, 15 मोबाइल के IMEI नंबर ब्लॉक
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साइबर ठगों पर बड़ा वार 80 सिम कार्ड बंद, 15 मोबाइल के IMEI नंबर ब्लॉक

इंदौर क्राइम ब्रांच ने NCRP से मिले तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे 80 सिम कार्ड बंद कराए हैं। इसके अलावा 15 मोबाइल फोन के IMEI नंबर ब्लॉक किए गए हैं। पुलिस ने अलग-अलग साइबर शिकायतों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर संदिग्ध नंबर और डिवाइस चिन्हित किए थे।

इंदौर: साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच इंदौर क्राइम ब्रांच ने डिजिटल अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए जा रहे 80 मोबाइल सिम कार्ड बंद कराए हैं। इसके साथ ही 15 मोबाइल फोन के IMEI नंबर भी ब्लॉक किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इन नंबरों और डिवाइस का इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़ी गतिविधियों में होने की जानकारी सामने आई थी।

NCRP की शिकायतों से मिले सुराग
इंदौर क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी  के मुताबिक, देशभर में दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। जांच में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर उपलब्ध शिकायतों और डिजिटल साक्ष्यों को आधार बनाया गया।

इस दौरान पुलिस ने ऐसे मोबाइल नंबरों की पहचान की, जिनका संबंध अलग-अलग साइबर ठगी के मामलों से सामने आया था। कुछ नंबर और मोबाइल डिवाइस बार-बार संदिग्ध गतिविधियों में इस्तेमाल होते मिले। इसके बाद संबंधित दूरसंचार एजेंसियों से संपर्क कर कार्रवाई कराई गई।

80 सिम कार्ड कराए बंद
जांच में संदिग्ध पाए गए कुल 80 सिम कार्ड बंद करा दिए गए। पुलिस के मुताबिक साइबर ठग लोगों को कॉल करने, फर्जी लिंक भेजने, बैंक अधिकारी बनकर बातचीत करने और ऑनलाइन ऑफर के नाम पर ठगी करने के लिए ऐसे नंबरों का इस्तेमाल करते हैं।

ठग अक्सर शिकायतें बढ़ने के बाद पुराने नंबर बंद कर नए सिम से अपना नेटवर्क चलाने लगते हैं। ऐसे में संदिग्ध नंबरों की पहचान कर उन्हें बंद करना पुलिस की कार्रवाई का अहम हिस्सा है।

15 मोबाइल के IMEI नंबर भी ब्लॉक
क्राइम ब्रांच ने केवल सिम कार्ड पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे 15 मोबाइल फोन के IMEI नंबर भी ब्लॉक कराए। IMEI मोबाइल की यूनिक डिजिटल पहचान होती है। इसके जरिए किसी डिवाइस की पहचान और उसके इस्तेमाल से जुड़ी जांच में मदद मिलती है।

 

पुलिस की कार्रवाई से ऐसे डिवाइस को मोबाइल नेटवर्क पर इस्तेमाल करना मुश्किल होगा, जिनका इस्तेमाल बार-बार साइबर अपराध में होने की जानकारी मिली थी।

ठगी के लिए कई तरीके अपनाते हैं अपराधी
साइबर ठग बैंक कर्मचारी, पुलिस अधिकारी या सरकारी विभाग का कर्मचारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। इसके अलावा KYC अपडेट, नौकरी, लोन, इनाम, निवेश और फर्जी लिंक के जरिए भी लोगों को निशाना बनाया जाता है।

इंदौर क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई का उद्देश्य साइबर ठगों के नेटवर्क में इस्तेमाल हो रहे मोबाइल नंबर और डिवाइस को निष्क्रिय करना है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है।

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