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रीवा-मऊगंज के 8 सरकारी अस्पताल होंगे आउटसोर्स, 5 साल तक निजी एजेंसी संभालेगी संचालन

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रीवा-मऊगंज के 8 सरकारी अस्पताल होंगे आउटसोर्स, 5 साल तक निजी एजेंसी संभालेगी संचालन
By - bhaskarbhoominews.com | 10 Aug 2026 09:48 PM
पायलट प्रोजेक्ट के तहत रीवा के 6 और मऊगंज के 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन टेंडर के जरिए चयनित निजी एजेंसी को 5 साल के लिए दिया जाएगा।
रीवा और मऊगंज जिले के सरकारी अस्पतालों में जल्द ही संचालन का तरीका बदल सकता है। मध्यप्रदेश शासन ने दोनों जिलों के 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को पायलट प्रोजेक्ट के तहत आउटसोर्स करने की मंजूरी दी है। अब इन अस्पतालों के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी टेंडर के जरिए चुनी जाने वाली निजी एजेंसी को दी जाएगी। यह व्यवस्था पांच साल के लिए होगी। हालांकि मरीजों को मिलने वाली सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं जारी रहेंगी और जरूरी दवाएं व टीके सरकार की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे।
रीवा के 6 और मऊगंज के 2 CHC होंगे आउटसोर्स
शासन की योजना में रीवा जिले के चाकघाट, गंगेव, गुढ़, रायपुर कर्चुलियान, रीठी और गोविंदगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामिल हैं। वहीं मऊगंज जिले के हनुमना और नईगढ़ी CHC को भी पायलट प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है। इस तरह दोनों जिलों के कुल 8 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन और प्रबंधन की व्यवस्था बदलेगी।
पांच साल तक निजी एजेंसी संभालेगी जिम्मेदारी
सरकार के आदेश के अनुसार निजी एजेंसी का चयन टेंडर प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। चयनित एजेंसी को पांच साल तक अस्पताल के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी मिलेगी।
एजेंसी के जिम्मे सिर्फ प्रशासनिक काम नहीं होंगे। उसे हाउसकीपिंग, सुरक्षा, अंदरूनी रखरखाव और निर्धारित मेडिकल व अन्य स्टाफ की व्यवस्था भी करनी होगी।
30 बेड के CHC में 41 कर्मचारियों का प्रावधान
शासन ने 30 बेड वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए कुल 41 कर्मचारियों का मानव संसाधन निर्धारित किया है। इसमें डॉक्टर, नर्स, मेडिकल ऑफिसर, विशेषज्ञ चिकित्सक, दंत चिकित्सक, फार्मासिस्ट, रेडियोग्राफर, लैब टेक्नीशियन, एएनएम, ओटी टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारी शामिल होंगे। अस्पताल की सुरक्षा के लिए तीन शिफ्ट के हिसाब से सुरक्षा कर्मचारियों और सफाई व्यवस्था के लिए कर्मचारियों का भी प्रावधान किया गया है।
दवाएं और टीके सरकार देगी
CHC को आउटसोर्स करने का मतलब यह नहीं है कि मरीजों को मिलने वाली सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं निजी एजेंसी के हवाले हो जाएंगी। सरकारी दवाएं और टीके विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे। ओपीडी, आईपीडी और ऑपरेशन के लिए जरूरी दवाओं व मेडिकल सामग्री की व्यवस्था भी सरकार करेगी। वहीं अस्पताल के संचालन, कर्मचारियों की उपलब्धता, सफाई, सुरक्षा और रखरखाव जैसे काम निजी एजेंसी के जिम्मे होंगे।
SLA में तय होंगी एजेंसी की जिम्मेदारियां
निजी एजेंसी के साथ सर्विस लेवल एग्रीमेंट (SLA) किया जाएगा। इसमें अस्पताल में उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं, उनकी गुणवत्ता और निर्धारित मानकों से जुड़ी शर्तें शामिल होंगी। पूरी व्यवस्था की निगरानी लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग करेगा।
सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा ट्रांसफर का विकल्प
आउटसोर्स होने वाले CHC में पहले से पदस्थ सरकारी कर्मचारियों के लिए भी व्यवस्था तय की गई है। ऐसे कर्मचारियों को जिले के दूसरे स्वास्थ्य संस्थानों में स्थानांतरण का विकल्प दिया जाएगा।
जो कर्मचारी ट्रांसफर का विकल्प चुनेंगे, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दूसरे स्वास्थ्य संस्थान में जा सकेंगे। वहीं अन्य कर्मचारियों के वेतन आदि से जुड़ी व्यवस्था शासन के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
अब टेंडर प्रक्रिया का इंतजार
फिलहाल शासन की मंजूरी के बाद अगला कदम निजी एजेंसी के चयन के लिए टेंडर जारी करना होगा। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयनित एजेंसी को पांच साल के लिए अस्पताल संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी।

